भारत की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। अप्रैल से जून के बीच देश की GDP वृद्धि दर 7.8% दर्ज की गई, जो पिछले साल की इसी अवधि के 6.9% के मुकाबले काफी अधिक है। हालांकि, जनवरी-मार्च तिमाही में दर्ज 8.6% की वृद्धि की तुलना में यह रफ्तार कुछ धीमी रही।
सरकार की ओर से जारी इन आंकड़ों ने अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश की है। खास बात यह है कि GDP का यह आंकड़ा ब्लूमबर्ग के सर्वे में लगाए गए 7.3% के औसत अनुमान और भारतीय रिजर्व बैंक के 7% के पूर्वानुमान से भी ऊपर रहा।
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का बड़ा योगदान
पहली तिमाही में आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर की अहम भूमिका मानी जा रही है। भारत लगातार अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और ऑटोमोबाइल, मोबाइल फोन, दवाइयों, केमिकल्स और स्टील जैसे क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ा है।
इसके साथ ही देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए भी बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
फिर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
मजबूत GDP आंकड़ों के बावजूद अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर को लेकर कुछ सवाल बने हुए हैं। सबसे बड़ी चुनौती मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी से जुड़ी है। फिलहाल अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान करीब 17% है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे बढ़ाकर 25% करने का लक्ष्य रखा है।
यानी उत्पादन और GDP ग्रोथ में मजबूती के बावजूद भारत को अपनी अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है।
पीएम मोदी ने बताया बड़ी उपलब्धि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने GDP के इन आंकड़ों को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों और वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया है।
हालांकि, GDP की तेज रफ्तार अपने आप में पूरी आर्थिक तस्वीर नहीं बताती। आने वाले समय में रोजगार, मांग, निवेश, औद्योगिक उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी जैसे संकेतक यह तय करने में अहम होंगे कि यह विकास कितना व्यापक और टिकाऊ है।